Monday, May 10, 2010

पुरानी सौगातें ......


खामोश धड़कन और बहकी सी सांसे 

खुशियों के मेले में मस्ती की राहें 
                                           
इंतजार में भटकी मासूम निगाहें

मन के भंवर की कुछ बीती सी यादें

सपनों में डूबी कुछ मीठी सी रातें

प्यार में खोयी हकीकत की बातें

दोस्तों के संग हुयी प्यारी मुलाकातें

क्यों याद आती हैं पुरानी सौगातें !

5 comments:

Saurabh said...

nice.

zeal said...

दोस्तों के संग हुयी प्यारी मुलाकातें

क्यों याद आती हैं पुरानी सौगातें !

beautiful !

Udan Tashtari said...

बढ़िया!

Shubham Singh said...

Good Feelings.

ana said...

sundar prastuti.............

Post a Comment